.नजर झुकाने से नमस्कार हो जाता है,
नजरें मिल जाने से प्यार हो जाता है,
आँसू भर जाने से इजहार हो जाता है,
हाथ हिला देने से इँतजार बच जाता है।
कभी प्यार की वजह केवल सूरत होती है,
कभी यह तनहाई की जरुरत हो जाती है,
कभी तो यह मन की ही शरारत होती है,
आखिरी में यह इबादत की मूरत बनती है।
प्यार करनेवालों के जुबां बहुत कम बोलते हैं,
वे तो हमेशा ही निगाहों से अपनी बात कहते हैं,
नयन की अदा बता देते ज़िगर का सब हिसाब,
इसीलिए आँसुओ की बूंद बन सदा टपकते हैं।
.नजर मिलाना दिल लगाना, यह तेरी आदत अजीब,
बात -ही-बात में इकरार करना, यह भी खुशनसीब,
सब कुछ लूट कर छोड़ देना, नहीं रखना कभी करीब,
अब जाऊँ कहाँ किस दर पर, कौन पूछेगा बदनसीब!
.नजर से नजर जब मिल जाती, अपने अपने न रह पाते हैं
।बन जाते एक दूजे के, कभी न जुदा रह पाते हैं।।
.नजरें-निगाहें नीचीं थी जरुर,
नयनों के कोर कम कँटीले नहीं थे;
मँद-मँद थी मधुर मुस्कान,
लेकिन अरुणारे अधर कम रसीले नहीं थे;
करकमल थे थामे पल्लू जरुर,
लेकिन अँग -प्रदर्शन कम भड़कीले नहीं थे,
देखने में थे लगते परम सौम्य मधुर,
लेकिन इरादे कम नशीले नहीं थे।
नजरों का नशा जो पिलाया, होश न मुझे;
अधरों को पिला दिया होता तो क्या होता!
.जब देखा मैंने उनकी नजरों की तवारीख के पन्ने,
कत्लेआम की कहानी पुरानी,
पूरा लहू-लहान नजर आया मुझे।
नजरों की बोल के भी होते हर्रफ,
तरानों के राग के भी होते अँदाज,
मौन के भी रहते सदा सुर-सँगीत,
कौन जानता 'नवीन'कवि मिजाज।
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